Home Dadi Maa Ke Nuskhe पीरियड के समय हैवी ब्लीडिंग रोकने के 23 घरेलु उपाय

पीरियड के समय हैवी ब्लीडिंग रोकने के 23 घरेलु उपाय

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पीरियड के समय हैवी ब्लीडिंग रोकने के 23 घरेलु उपाय

पीरियड के समय हैवी ब्लीडिंग रोकने के 23 घरेलु उपाय

हैवी ब्लीडिंग(Menorrhagia) जिसे हिंदी में रक्त प्रदर के नाम से भी जाना जाता है। पीरियड्स के समय हैवी ब्लीडिंग का मतलब मासिक धर्म के दिनों में योनि से अधिक रक्तस्राव होता है। रक्त प्रदर रोग में स्त्रियां शारीरिक रूप से बहुत निर्बल हो जाती हैं, क्युकी हैवी ब्लीडिंग के दौरान उनके शरीर से ज्यादा कहौं बाहर आ जाता है। योनि से अधिक रक्तस्राव होने के कारण रोगी स्त्रियां अधिक समय तक इस बीमारी को छिपाकर रखती हैं। और संकोच की प्रवृत्ति पीरियड्स के समय हैवी ब्लीडिंग के प्रॉब्लम को और ज्यादा कर देती है।

हैवी ब्लीडिंग की प्रॉब्लम क्यों होती है?

‘विवाह से पहले और युवावस्था के प्रारंभ में जो लड़कियां शारीरिक संबंधों में संलग्न होने लगती हैं उन्हें रक्त प्रदर यानी पीरियड के समय हैवी ब्लीडिंग की बीमारी की अधिक संभावना रहती है। लड़कियों में हस्तमैथुन व अप्राकृतिक मैथुन के कारण रक्त प्रदर हो सकता है। भोजन में अधिक मिर्च-मसाले, खटटे, वसायुक्त, उष्ण और मांस-मछली आदि खाद्य-पदार्थों के अधिक सेवन से मासिक धर्म की बीमारी के साथ पीरियड के समय हैवी ब्लीडिंग की प्रॉब्लम होती है।

पीरियड्स के समय हैवी ब्लीडिंग का इलाज

रक्त प्रदर रोग में मासिक धर्म के समय अधिक रक्तस्राव होता है। अधिक खून आने की प्रॉब्लम पीरियड्स के अलावा किसी समय भी हो सकती है। ज्यादा ब्लीडिंग आने की समस्या कई-कई दिन तक चल सकता है। गर्भपात कराने से रक्त प्रदर की बीमारी हो सकती है। अधिक शोक, चिंता, क्रोध, ईष्र्या और शारीरिक क्षमता से अधिक परिश्रम भी पीरियड्स के समय हैवी ब्लीडिंग की समस्या सुरु कर सकती है।

हैवी ब्लीडिंग के समय लड़कियों को कौन कौन सी प्रॉब्लम होती है ?

रक्त प्रदर से पीड़ित स्त्रियों को कमर में दर्द, रक्ताल्पता, शारीरिक निर्बलता, सिर में चक्कर आने, नेत्रों के आगे अंधेरा छाने, अधिक प्यास लगने के लक्षण दिखाई देते हैं। जांघों, पिंडलियों और नाभि के आस-पास शूल होता है। रक्त-विकार की बीमारी पित्त के कुपित होने से अधिक होती है, इसलिए इस रोग से बचने के लिए पित्त उत्पन्न करने वाले खाद्य पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए। स्त्रियों को ‘सहवास’ से अलग रहना चाहिए।

घर बैठे करे पीरियड्स के समय हैवी ब्लीडिंग का इलाज

पीरियड्स में ज्यादा ब्लीडिंग को रोकने के घरेलू नुस्खे

  • शुद्ध गेरू डेढ़ माशे, फिटकरी 1 तोले दोनों को पीसकर 1 माशा मात्रा में प्रातः सायं दूध के साथ सेवन करने से रक्त प्रदर की बीमारी नष्ट होती है।
  • माजूफल 25 ग्राम लेकर 200 ग्राम जल में क्वाथ बनाएं, उसमें 3 ग्राम रसौत और फिटकरी 3 ग्राम मिलाकर योनि स्वच्छ करने से रक्त प्रदर में लाभ होता
  • आंवले के 10 ग्राम रस में शर्करा मिलाकर सेवन करने से जलन व दाह नष्ट होती है।
  • क्षीरी वृक्षों की छाल 50 ग्राम का 400 ग्राम जल में क्वाथ बनाकर पिचकारी से योनि स्वच्छ करने से रक्त प्रदर का प्रकोप कम होता है।
  • केले की कोमल जड़ का रस 10 ग्राम मात्रा में प्रतिदिन सेवन करने से रक्त प्रदर में बहुत लाभ होता है।
  • गाजर का रस 100 ग्राम मात्रा में सुबह-शाम प्रतिदिन पीने से रक्त प्रदर की बीमारी नष्ट होती है।
  • कुकरोंदा की 6 ग्राम जड़ को पीसकर 150 ग्राम दूध में मिलाकर पीने से कुछ सप्ताह उपरांत रक्त प्रदर की बीमारी नष्ट होती है।

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पीरियड्स के दौरान हैवी ब्लीडिंग रोकने के आयुर्वेदिक नुस्खे

  • गूलर की ताजी छाल 20 ग्राम को 250 ग्राम जल में उबालकर 50 ग्राम शेष रह जाने पर उसमें 25 ग्राम मिसरी और 2 ग्राम सफेद जीरे का चूर्ण मिलाकर सेवन करने से रक्त प्रदर से मुक्ति मिलती है।
  • वन चौलाई की जड़ का 15 ग्राम रस दिन में दो-तीन बार प्रतिदिन पिलाने से रक्त प्रदर की बीमारी में बहुत लाभ होता है।
  • राल, बबूल का गोंद और रसौत तीनों 5-5 ग्राम लेकर कूट-पीसकर चूर्ण बनाकर 5 ग्राम मात्रा में दूध के साथ प्रतिदिन सेवन करने से रक्त प्रदर नष्ट होता है।
  • 50 ग्राम चावलों को जल से साफ करके फिर 100 ग्राम जल में डालकर रखें चार घंटे के बाद उन चावलों को उसी जल में थोड़ा-सा मसलकर धोवन पीने से रक्त प्रदर नष्ट होता है।
  • बेर के पत्ते 10 ग्राम, काली मिर्च 5 दाने और मिसरी 20 ग्राम को पीसकर 100 ग्राम जल में मिलाकर पीने से रक्त प्रदर में लाभ होता है।
  • अनार के फूल, गोखरू और शीतल चीनी प्रत्येक 10-10 ग्राम लेकर कूट-पीसकर चूर्ण बनाकर 3 ग्राम चूर्ण प्रतिदिन जल के साथ सेवन करने से रक्त प्रदर में बहुत लाभ होता है।

पीरियड्स के दौरान ज्यादा ब्लीडिंग रोकने के 10 उपाय

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पीरियड्स के दौरान ज्यादा ब्लीडिंग रोकने के 10 उपाय

    1. आंवलों को पीसकर 5 ग्राम मात्रा में मधु 3 ग्राम मिलाकर दिन में दो बार सेवन करने से रक्त प्रदर में बहुत लाभ होता है।
    2. हरड़, रसौत और आंवलों को 10-10 ग्राम मात्रा में लेकर कूट-पीसकर 5 ग्राम चूर्ण जल के साथ सेवन करने से रक्त प्रदर की बीमारी का निवारण होता है।
    3. 25 ग्राम आंवले का चूर्ण 50 ग्राम जल में डालकर रखें। प्रातः उठकर उसमें जीरे का 1 ग्राम चूर्ण और 10 ग्राम मिसरी मिलाकर पीने से रक्त प्रदर से मुक्ति मिलती है।
    4. अपामार्ग के पत्ते 10 ग्राम, काली मिर्च 5 दाने और गूलर के पत्ते 3 ग्राम को पीसकर चावलों के धोवन (जल) के साथ सेवन करने से रक्त प्रदर में लाभ होता है
    5. चंदन का चूर्ण 5 ग्राम को दूध में पकाकर, 10 ग्राम घी व 25 ग्राम शर्करा मिलाकर सेवन करने से रक्त प्रदर की बीमारी नष्ट होती है।
हैवी ब्लीडिंग रोकने के उपाय

6. ताजी दूब को जड़ के साथ उखाड़कर जल से धोकर बिल्कुल साफ करें। फिर उस दूब को जल के साथ पीसकर, किसी कपड़े में बांधकर रस निकालें। 7-8 ग्राम रस सुबह के समय पीने से रक्तस्राव की बीमारी नष्ट होती है।

7. हरड़, रसौत और आंवला को बराबर मात्रा में लेकर, कूट-पीसकर बारीक चूर्ण बनाकर रखें। प्रतिदिन 2 ग्राम चूर्ण जल के साथ सुबह-शाम सेवन करने से रक्त प्रदर में बहुत लाभ होता है।

8. अश्वगंधा को कूट-पीसकर चूर्ण बना लें। प्रतिदिन 3 ग्राम चूर्ण सुबह और शाम गाय के दूध के साथ सेवन करने से रक्त प्रदर का निवारण होता है।

9. रक्त प्रदर से पीड़ित स्त्रियों को योनि की स्वच्छता का विशेष ध्यान रखना चाहिए। हर बार मात्र त्याग के बाद स्वच्छ जल से प्रक्षालन करना चाहिए। मासिक धर्म के समय स्वच्छ पैड, कॉटन व कपड़े का इस्तेमाल करें। रक्तस्राव होने पर योनि को डिटोल मिले जल से साफ करें। अशोकारिष्ट पीने से भी रक्त प्रदर रोग में बहुत लाभ होता है।

10. अधिक रक्त प्रदर होने पर चावलों के धोवन (जल) से 5 ग्राम गेरू सेवन करने से रक्त प्रदर नष्ट होता है।

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रक्त प्रदर अथार्त  हैवी ब्लीडिंग प्रॉब्लम पे आधारित एक घटना

दादी मां की बड़ी बहू ने एक दिन दादी मां से रक्त प्रदर के बारे में पूछा। दादी मां ने कहा—‘बहू! पहले यह बताओ कि रक्त प्रदर रोग किसको हुआ है? मैं उस रोगी से उसके रोग के विषय में पूछताछ करके ही कोई दवा दे सकती हूं।’ बड़ी बहू ने अपनी सहेली को बुलाकर दादी मां से बात कराई। दादी मां ने उससे रक्त प्रदर के विषय में पूछा। उस युवती का तीसरा बच्चा ‘सीजेरियन ऑपरेशन’ से हुआ था।

उस ऑपरेशन में पता नहीं क्या गड़बड़ी हुई थी कि प्रसव के बाद कुछ दिनों तक योनि से रक्तस्राव होता रहा, अब भी जब-तब योनि से रक्तस्राव हो जाता है।दादी मां ने कुछ अन्य बातें पूछकर बड़ी बहू की सहेली को दवा बनाकर दी। तीन-चार सप्ताह में रक्त प्रदर में लाभ होता दिखाई देने लगा।

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