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बदहज़मी रोग के कारण और घरेलु इलाज

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बदहज़मी रोग के कारण और घरेलु इलाज

बदहज़मी रोग के कारण और घरेलु इलाज

बदहज़मी रोग के कारण और घरेलु इलाज़ जानने से पहले हमको ये जान लेना चाहिए बदहज़मी होती क्या है। दोस्तों बदहज़मी यानी खाने का न पचना जिसको हम इंग्लिश भाषा में indigestion कहते है।

बदहज़मी रोग क्यों होता है ?

दादी मां सेबदहज़मी रोग क्यों होता है  पूछा तो उन्होंने बताया-‘सुनो! हर समय कुछ-न-कुछ खाते रहने, प्रकृति विरुद्ध खाद्य-पदार्थों का सेवन करने और बिल्कुल शारीरिक श्रम न करने वाले स्त्री-पुरुष व किशोर बदहज़मी रोग से पीड़ित होते हैं।

भोजन करने के बाद उसकी पाचन क्रिया सम्पन्न होने से पहले जो स्त्री-पुरुष व किशोर कुछ खाते-पीते हैं तो पाचन क्रिया ख़राब होती है। आमाशय में पहले ही अधपका भोजन होता है और ऊपर से नया भोजन पहुंच जाता है। कुछ दिनों तक ऐसा करने से बदहज़मी की उत्पत्ति होती है।

अधिक घी, तेल से बने मिर्च-मसालों व अम्ल रस के खाद्य-पदार्थ अति शीघ्र बदहज़मी की उत्पत्ति करते हैं। घी, तेल के खाद्य पदार्थ गरिष्ठ होने के कारण देर से पचते हैं। ऐसे में जल्दी-जल्दी दूसरे खाद्य पदार्थों का सेवन करने वाले जब बिल्कुल शारीरिक श्रम नहीं करते, दिन में अधिक देर तक सोते हैं तो बदहज़मी रोग से पीड़ित होते हैं।

बदहज़मी रोग के कारण-

जल्दी-जल्दी भोजन करने, अनियमित समय पर भोजन करने, मांस-मछली, शराब, तंबाकू चाय-कॉफी का अधिक सेवन करने से भी बदहज़मी की समस्या होती है। शारीरिक रूप से निर्बल, रक्ताल्पता के शिकार रत्री-पुरुष, किशोर व प्रीढ़ बदहज़मी से अधिक रोगग्रस्त होते बदहज़मी रोग में रोगी को भूख नहीं लगती। भोजन से उसे अरुचि-सी हो जाती है।

सभी चीजें बेस्वाद लगने लगती हैं। रोगी को जल्दी-जल्दी खट्टी डकार आने लगती हैं।छाती में तीव्र जलन होने लगती है। बदहज़मी रोगी पेट में बदहज़मी अर्थात बदहज़मी आने से बहुत पीड़ित होते हैं। बदहज़मी के साथ रोगी को अक्सर कब्ज (कब्ज) की समस्या होती है। रोगी अधिक घबराहट अनुभव करता है

शारीरिक रूप से रोगी अधिक थकावट अनुभव करता है। रोगी कोई भी शारीरिक श्रम का काम नहीं करना चाहता। यदि कोई शारीरिक श्रम का काम करना चाहता है तो जल्दी ही उसका शरीर पसीने से भीग जाता है। हृदय जोरों से धड़कने लगता है।

अधिक क्रोधी स्वभाव के स्त्री-पुरुष, ईष्र्या-द्वेष, चिंता और मानसिक तनाव से ग्रस्त व्यक्ति बदहज़मी से पीड़ित होते हैं। बदहज़मी के रोगी अनिद्रा (नींद न आना) की समस्या से भी पीड़ित होते हैं। कभी-कभी  दस्त भी हो जाता है।

बदहज़मी रोग का इलाज करने के लिए दादी माँ के घरेलु नुस्खे-

  • सोंठ और धनिया 25-25 ग्राम लेकर 200 ग्राम पानी में उबालकर क्वाथ बनाएं। 50 ग्राम शेष रह जाने पर छानकर पीएं।
  • हरड़ का चूर्ण 3 ग्राम मात्रा में मधु, किशमिश और मिश्री मिलाकर सेवन करने से बदहज़मी रोग नष्ट होता है।
  • हरड़, सोंठ को बराबर मात्रा में कूट-पीसकर चूर्ण बनाएं। इसमें से 3 ग्राम चूर्ण और थोड़ा-सा गुड़ तक्र के साथ सेवन करें।
  •  प्याज को बारीक-बारीक काटकर उसमें नीबू का रस और सेंधा नमक मिलाकर खाने से बदहज़मी में बहुत लाभ होता है।
  • दालचीनी, इलायची, सोंठ और जीरा चारों वस्तुएं 20-20 ग्राम मिलाकर कूट-पीसकर रखें। इस चूर्ण की तीन ग्राम मात्रा हल्के गर्म पानी से सुबह और शाम लेने से बदहज़मी विकार नष्ट होता है।

बदहज़मी रोग के इलाज के आयुर्वेदिक नुस्खे-

  • 200 ग्राम तक्र, भुना हुआ जीरा आधा ग्राम, काली मिर्च के 5 दाने पीसकर मिलाकर स्वाद के अनुसार सेंधा नमक डालकर पीएं।।
  • साँठ का चूर्ण 3 ग्राम, यवक्षार आधा ग्राम मिलाकर घी के साथ चाटें।
  • हरड़, पिप्पली और सोंठ तीनों को बराबर मात्रा में लेकर कूट-पीसकर चूर्ण बनाकर रखे। सुबह-शाम 3-3 ग्राम चूर्ण पानी के साथ सेवन कर।

बदहज़मी रोग के इलाज के आयुर्वेदिक नुस्खे

  • दो टमाटर काटकर सेंधा नमक और काली मिर्च का चूर्ण डालकर सुबह-शाम खाने से बदहज़मी विकार नष्ट होता है।
  • सोंठ, काला नमक और पोदीना सभी 1-1 ग्राम मात्रा में लेकर इसमें चित्रक की मूल 2 ग्राम मिलाकर सबको पीसकर पानी में मिलाकर सुबह-शाम पीने से पाचन क्रिया प्रबल होने से बदहज़मी की समस्या नष्ट होती है।

बदहज़मी रोग के इलाज के घरेलु नुस्खे-

  • 200 ग्राम नीबू के रस में 100 ग्राम शक्कर मिलाकर, शीशे के पात्र में 20 दिन तक धूप में रखें। उसके बाद 3 ग्राम मात्रा भोजन से पहले चाटने से अरुचि नष्ट होने के साथ पाचन-शक्ति प्रबल होती है।
  • हींग और जीरा 10-10 ग्राम मात्रा में भूनकर, सोंट और सेंधा नमक 10-10 ग्राम मिलाकर सबको कूट-पीसकर चूर्ण बनाकर रखें। तीन ग्राम मात्रा में भोजन के बाद इस चूर्ण को पानी के साथ सेवन करें।
  • धनिए और सोंठ को 20-20 ग्राम मात्रा में कूट-पीसकर चूर्ण बनाएं। 3 ग्राम चूर्ण हल्के गर्म पानी के साथ सेवन करें।

बदहज़मी रोग के इलाज का घरेलू उपाय

  • पीपर का चूर्ण 2 ग्राम मात्रा में मधु मिलाकर सुबह-शाम सेवन करें।
  • नाशपाती के 20 ग्राम रस में पीपल का चूर्ण 1 ग्राम मिलाकर सेवन करें।
  • तुलसी के पत्तों का रस 10 ग्राम मात्रा में कुछ दिनों तक सेवन करें।
  • अमरूद के कोमल पत्तों के 10 ग्राम रस में थोड़ी-सी शक्कर 5 ग्राम मिलाकर प्रतिदिन सेवन करने से बदहज़मी रोग नष्ट होता है।
  • गाजर का रस 200 ग्राम मात्रा में प्रतिदिन थोड़ा-सा सेंधा नमक व सोंठ का चूर्ण या काली मिर्च का चूर्ण 2 ग्राम डालकर पीएं।

बदहज़मी रोग के इलाज का घरेलू उपाय

जब कोई व्यक्ति समय-असमय, अनियमित रूप से भोजन करता है, एक बार भोजन करने के बाद उसके पचने से पहले भोजन करता है और हर समय कुछ-न-कुछ खाता रहता है, पाचन क्रिया की समस्या से ऐसे व्यक्ति बदहज़मी रोग से पीड़ित होते हैं।

बदहज़मी रोग में पेट दर्द पर दादी माँ की छोटी से बातचीत-

दादी मां के पोते बकुल को हर समय कुछ-न-कुछ खाते रहने की बुरी आदत है। सबके साथ भोजन करने के बाद 30-35 मिनट के बाद ही बकुल किचन में जाकर कुछ-न-कुछ खाता दिखाई देता है।जब घर में उसे कोई चटपटी चीज खाने को नहीं मिलती तो वह बाजार में जाकर खा आता है।

भोजन की इस अनुचित आदत ने बकुल को बदहज़मी रोग का शिकार बना दिया। बकुल पाचन क्रिया बिगड़ने से परेशान हो गया।

उसकी भूख नष्ट हो गई और खट्टी डकारें आने लगीं। स्वादिष्ट खाद्य-पदार्थ भी उसे बेस्वाद लगने लगे।

बकुल की मम्मी ने दादी मां से कहा। दादी मां ने बकुल को बुलाकर सारी बातें पूछी। सब बातें पूछने के बाद दादी मां समझ गईं कि बकुल बदहज़मी रोग से पीड़ित है।

दादी मां ने अपनी जड़ी-बूटियों की तिजोरी से कुछ जड़ी-बूटियां निकालकर उन्हें कूट-पीसकर चूर्ण बनाकर बकुल को खिलाया। एक सप्ताह में बकुल ‘निरोग’ हो गया।

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