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पेचिश रोग के लक्षण, कारण, इलाज़ और परहेज – Dysentery Treatment

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पेचिश रोग के लक्षण, कारण, इलाज़ और परहेज

पेचिश रोग के लक्षण, कारण, इलाज़ और परहेज

पेचिश रोग में मल विसर्जन {फ्रेश होते वक्त} के समय रोगी के पेट में बहुत ऐंठन मरोड़ होती है बार-बार शौच जाने और ऐंठन होने से रोगी बहुत परेशान हो जाता है। आंव के रूप में मल का निष्कासन होने व रक्तस्राव होने से रोगी शारीरिक रूप से बहुत निर्बल हो जाता है। आगे इस लेख में हम आपको पेचिश रोग के लक्षण, कारण, इलाज़ और परहेज के बारे में बताएंगे।

प्रवाहिका / पेचिश रोग क्यों होता है?

‘पेचिश का रोग विशेष तरह के जीवाणुओं द्वारा उत्पन्न होता है। इस रोग से पीड़ित जब कोई स्त्री-पुरुष खेतों में मल त्याग करता है तो मक्खियां उस मल पर बैठकर रोग के जीवाणुओं को घरों में खाद्य पदार्थों तक पहुंचा देती हैं।
खेतों से लाई सब्जियों के साथ भी पेचिश के जीवाणु चिपके रहते हैं। जब ऐसी सब्जियों को पानी से साफ किए बिना काटकर इस्तेमाल किया जाता है तो खाने वाले पेचिश रोग के शिकार बन जाते हैं।

वर्षा ऋतु में कुओं, तालाबों के दूषित पानी को पीने से भी पेचिश रोग की उत्पत्ति होती है। पेट में पहुंचकर जीवाणु तेजी से फैलते हैं और आंत्रों में जख्म बना देते हैं।फिर मल के साथ आंव व रक्त निकलने लगता है। मल का परीक्षण करने पर जीवाणु का पता चल जाता है।

पेचिश रोग के प्रारंभ में नाभि के आस-पास, आंत्रों में तीव्र शूल होता है। ऐठन की पीड़ा से रोगी दोहरा हो जाता है। मल के साथ आंव निकलती है तो बहुत दुर्गन्ध आती। है।
पेट में वायु भर जाने से बहुत पीड़ा होती है। अधिक रक्तस्राव होने से रोगी क्षीण होकर बिस्तर पर लेट जाता है। उसके शरीर में पानी का अभाव हो जाता है।

पेचिश का उपचार – Treatment for dysentery in Hindi

पेचिस के इलाज के 10 अचूक घरेलू नुस्खे

पेचिस के इलाज के 10 अचूक घरेलू नुस्खे

  • भूनी सौंफ 100 ग्राम, सोंठ भुनी हुई 100 ग्राम, हरड़ भुनी हुई 30 ग्राम, तीनों को कूट-पीसकर चूर्ण बना लें। इसमें 250 ग्राम शक्कर मिला लें। इस मिश्रण को 10 ग्राम मात्रा में हल्के गर्म पानी में दिन में तीन बार सेवन करें।
  •  कच्ची बेल की गिरी 25 ग्राम को पुराने गुड़ 6 ग्राम के साथ दिन में चार बार सेवन कराकर, गर्म पानी पिलाने से पेचिश में लाभ होता है।
  •  चावलों को उबालकर दही मिलाकर खाने से बहुत लाभ होता है। दही में भुना हुआ जीरा और स्वाद के अनुसार सेंधा नमक भी डालकर खाएं।
  •  मेथी के दानों का चूर्ण बनाकर (3 ग्राम मात्रा में) दही 100 ग्राम में मिलाकर खाने से ऐंठन-मरोड़ से मुक्ति मिलती है।
  • आम की गुठली के भीतरी भाग गिरी (बिजली) और जामुन की गुठली को बराबर मात्रा में लेकर चूर्ण बना लें। इसमें से 6 ग्राम चूर्ण हल्के गर्म पानी से दिन में चार बार सेवन करने से पेचिश में रक्तस्राव भी नष्ट हो जाता है।

पेचिस का इलाज घर बैठे कैसे करे

  •  अनार का रस 100 ग्राम सुबह-शाम पीने से रक्तस्राव बंद होता है।
  •  पांच ग्राम ईसबगोल को रात्रि में पानी में भिगोकर रखें। सुबह उठकर पीने से पेचिश का निवारण होता है। दिन में दो बार सेवन करें।
  • कुटज की छाल 10 ग्राम, अनार का छिलका 10 ग्राम, 500 ग्राम पानी में उबालकर 100 ग्राम शेष रह जाने पर छानकर पीने से लाभ होता है।
  •  अनार के कच्चे फल का रस 2 तोले मात्रा में पिलाने से लाभ होता है।
  • सौंफ 100 ग्राम भुनी हुई, सौंफ 100 ग्राम बिना भुनी, सूखा धनिया, मिश्री और बेलगिरी सभी 100-100 ग्राम लेकर इसमें 30 ग्राम सोंठ मिलाकर चूर्ण बनाकर रखें। 5-5 ग्राम मात्रा में इस चूर्ण को हल्के गर्म पानी से दिन में तीन-चार बार सेवन करने से पेचिश से मुक्ति मिलती है।

पेचिस के इलाज के लिए दादी माँ के घरेलु नुस्खे

  • छोटी हरड़ और सौंफ को बराबर मात्रा में लेकर घी में भूनकर चूर्ण बनाकर, इसमें दोनों के बराबर मिश्री मिला लें। इस चूर्ण को 5 ग्राम मात्रा में दिन में दो-तीन बार हल्के गर्म पानी से सेवन करें।
  • कुटज की छाल को तक्र (मट्ठा) में पीसकर सेवन करने और ऊपर से सेंधा नमक, भुना जीरा डालकर तक्र पीने से बहुत लाभ होता है।
  • सोंठ, हरड़ के छिलके, सेंधा नमक, मोरडफली चारों को बराबर मात्रा में कूट-पीसकर चूर्ण बना लें। इस चूर्ण को 5 ग्राम मात्रा में दिन में दो-तीन बार हल्के गर्म पानी में सेवन करने पर बहुत लाभ होता है।
  • बेलगिरी और आम की गुठली की गिरी दोनों को बराबर मात्रा में लेकर बारीक चूर्ण बना लें। 5 ग्राम चूर्ण हल्के गर्म पानी से सेवन करें।

दस्त के इलाज का रामबाण आयुर्वेदिक नुस्खा

  • ईसबगोल और मिश्री का चूर्ण दोनों 10-10 ग्राम, दिन में दो-तीन बार पानी के साथ सेवन करने से पेचिश में बहुत लाभ होता है।
  • सोंठ, जीरा, काली मिर्च और सेंधा नमक सभी बराबर मात्रा में लेकर चूर्ण बना लें। इस चूर्ण को 5 ग्राम मात्रा में दिन में दो-तीन बार तक्र या गर्म पानी से सेवन करने पर पेचिश का निवारण होता है।
  • अतीस का चूर्ण 1 ग्राम, मुलहठी का चूर्ण 500 मिलीग्राम दिन में तीन बार गर्म पानी से सेवन करने पर पेचिश का प्रकोप नष्ट होता है।
  • आंवले के 10 ग्राम रस में 5 ग्राम घी और मधु मिलाकर सेवन करने और ऊपर से बकरी का दूध पीने से बहुत लाभ होता है।
  • ईसबगोल 6 ग्राम, एरंड का तेल 20 ग्राम दोनों को 100 ग्राम गाय के दूध के साथ सेवन करने से आंत्रों में रुका हुआ मल निष्कासित होने से पेचिश नष्ट हो जाती है।
  • ईसबगोल 6 ग्राम दही या तक्र के साथ सेवन करने से पेचिश नष्ट होती है।
दादी ने कैसे किया पेचिस का इलाज

दादी मां के पास एक दिन पड़ोस की एक नवयुवती आई। उसने बातें करते-करते कहा
‘दादी मां! मेरे मायके में मेरे भाई को कई दिनों से पतले दस्त लगे हुए हैं। मल के साथ आंव आती है और पेट में बहुत ऐंठन-मरोड़ होती है। कई डॉक्टरों से दवा ली, लेकिन उसे कोई लाभ नहीं हो रहा।’
‘अरी बहू! तेरे भाई को दस्त का रोग नहीं। उसे तो प्रवाहिका अर्थात पेचिश रोग हुआ है। दस्त और पेचिश दोनों में रोगी बार-बार शौच जाता है। उसे पतले दस्त होते हैं। दस्त में रोगी शौच जाते ही मल त्याग कर जल्दी लौट आता है। लेकिन पेचिश में रोगी शौच में बैठना चाहता है, क्योंकि उसे लगता है कि अभी शौच आएगी। पेचिश रोग में आंव मल के साथ निकलती है और पेट में ऐंठन, मरोड़ के कारण बहुत पीड़ा होती है।

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