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जाने अस्थमा रोग के कारण और घरेलु उपाय

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जाने अस्थमा रोग के कारण और घरेलु उपाय

जाने अस्थमा रोग के कारण और घरेलु उपाय

अस्थमा आधुनिक परिवेश में तीव्र गति से स्त्री-पुरुष और बच्चों को अपना शिकार  बना रहा है। सड़कों पर कार, बस और ट्रकों का धुआं और घरों के आस-पास फैक्ट्री की गैसें जब लोगों के शरीर में पहुंचती हैं तो फेफड़ों को सबसे अधिक हानि पहंचती है।प्रदूषित वातावरण में अधिक रहने से सांस रोग अस्थमा की उत्पत्ति होती है।

अस्थमा रोग को ही हिंदी में दमा रोग के नाम से जाना जाता है। अस्थमा के इलाज से पहले हमें ये जान लेना आवश्यक है की अस्थमा रोग क्यों होता है।

अस्थमा रोग क्यों होता है ?

‘अधिक दिनों तक दूषित और बासी शीतल खाद्य-पदार्थों का सेवन करने और प्रदूषित वायु के वातावरण में रहने से अस्थमा की उत्पत्ति होती है। आधुनिक परिवेश में एलर्जी के कारण अस्थमा की अधिक उत्पत्ति होती है, जबकि कुछ किशोर लड़के-लड़कियां वंशानुगत अस्थमा से पीड़ित होते हैं। परिवार में माता या पिता में से किसी एक को अस्थमा होने पर उनकी संतान को भी अस्थमा रोग हो सकता है।

वर्षा ऋतु में अस्थमा का प्रकोप अधिक होता है। वर्षा ऋतु में आर्द्रता(जल वाष्प) होने से वातावरण में अधिक उमस हो जाती है। ऐसे वातावरण में अस्थमा रोगी को सांस लेने में अधिक कठिनाई होती है। ऐसे में रोगी पर अस्थमा का दौरा पड़ सकता है।

अस्थमा का रोगी गहरी सांस नहीं ले पाता तो उसे अपना सांस घुटता हुआ अनुभव होता है, रोगी जितना भयभीत होता है, अस्थमा का दौरा उतना अधिक पीड़ित करता है। कई बार तो रोगी बेसुध होकर गिर पड़ता है।

अस्थमा रोग में रोगी को बहुत अधिक खांसी उठती है। निरंतर खांसने से रोगी परेशान हो जाता है। देर तक खांसने पर थोड़ा-सा कफ (बलगम) निकलता है तो खांसी का प्रकोप कम होता है। अस्थमा का दौरा रात के समय अधिक होने से रोगी की नींद नष्ट हो जाती है।

घुटनों में सिर रखकर बैठने से रोगी को कुछ आराम मिलता है। यदि किसी वस्तु में एलर्जी के कारण अस्थमा का दौरा प्रारंभ होता हो तो रोगी को उस ‘एलर्जिक वस्तु’ का पता लगाकर उससे अलग रहने की कोशिश करनी चाहिए।

खाने-पीने की चीजों से भी एलर्जी हो सकती है। कुछ स्त्री-पुरुषों को फूल से तो कुछ को पालतू पशु-पक्षियों से एलर्जी हो सकती है। धूल उड़ने से भी एलर्जी का प्रकोप हो सकता है।

अस्थमा रोग क्यों होता है ?

अस्थमा (दमा) रोग पर एक छोटी सी घटना

दादी मां के पूरे परिवार को एक बार किसी रिश्तेदार के यहां विवाह में सम्मिलित होने के लिए जाना पड़ा। उस रात दादी मां को सपरिवार यहां ठहरना पड़ा। दादी मां और परिवार के दूसरे सभी सदस्य एक कमरे में सो रहे थे कि अचानक कुछ शोर सुनकर उठ बैठे। दादी मां ने कमरे के बाहर जाकर देखा। उस परिवार की एक युवती को अस्थमा का दौरा पड़ा था। तुरंत उस युवती को समीप के अस्पताल में ले जाया गया। दो दिन अस्पताल में रहकर वह युवती घर लौट आई।

दादी मां ने फोन पर उस युवती से बात की और फिर कहा-‘तुम अगर कहो तो मैं तुम्हें अस्थमा की औषधि दे सकती हूं। मैं तुम्हें जड़ी-बूटियों से औषधि बनाकर दूंगी। बस, तुम्हें शीतल व मिर्च-मसालों के खाद्य-पदार्थों से परहेज करना पड़ेगा।

उसने दादी मां की सारी बातें स्वीकार कर लीं। दादी मां ने उस युवती को दवा बनाकर भेज दीं। दो-तीन सप्ताह बाद दादी मां की औषधियां खाने से अस्थमा का प्रकोप कम होता दिखाई देने लगा।

आगे हम दादी माँ की अस्थमा रोग ठीक करने वाले जड़ी बूटियों के बारे में बात करने वाले हैं।

दादी मां के अस्थमा में गुणकारी नुस्खे

अस्थमा से कैसे बचे?

  • सोंट, सेंधा नमक, जीरा, भुनी हुई हींग और तुलसी के पत्ते सभी चीजें बराबर मात्रा में लेकर कूट-पीसकर चूर्ण बनाकर रखें। इसमें से 10 ग्राम मिश्रण को 300 ग्राम जल में उबालकर काढ़ा बनाकर पिलाने से अस्थमा में बहुत लाभ होता है।
  • कब्ज़ को नष्ट करने के लिए रात्रि में एरंड के 5 ग्राम तेल को गर्म जल के साथ लेने से बहुत लाभ होता है।
  • रोगी को प्रतिदिन दूध का सेवन करना चाहिए। दूध से अधिक कफ की समस्या को रोकने के लिए दूध को उबालते समय दो पिपल डाल लें। फिर उस दूध को छानकर मिसरी मिलाकर सेवन करें।
  • मोर के पंखों की भस्म बनाकर आधा ग्राम में, पिप्पली के 1 ग्राम चूर्ण के साथ मधु मिलाकर चटाने से बहुत लाभ होता है।

अस्थमा रोग के इलाज के लिए 5 रामबाड आयुर्वेदिक नुस्खे

  1. अदरक के 5 ग्राम रस को मधु मिलाकर सेवन करें। छाती पर सैंधवादि तेल की मालिश से सांस का अवरोध नष्ट होता है।
  2. ग्वारपाठे के 250 ग्राम पत्तों और 25 ग्राम सेंधा नमक के चूर्ण को एक मिट्टी के पात्र में रखकर भस्म बनाएं। उस भस्म को 2 ग्राम मात्रा में 10 ग्राम मुनक्का के साथ खाने से सांस रोग में बहुत लाभ होता है।
  3. कुष्ठ (कुठ) के 5 ग्राम चूर्ण को घी, मधु और निम्ब के काढ़ा के साथ सेवन करने से अस्थमा में लाभ होता है।
  4. नीबू का रस 10 ग्राम, अदरक का रस 5 ग्राम मिलाकर गर्म जल के साथ पीने से अस्थमा का प्रकोप शांत होता है।
  5. लहसुन का रस 10 ग्राम मात्रा में गर्म जल के साथ सेवन करने से अस्थमा रोगी का सांस अवरोध कम होता है।

अस्थमा रोग का घरेलु इलाज

  • प्याज का रस, अदरक का रस, तुलसी के पत्तों का रस और मधु सभी 3-3 ग्राम मात्रा में लेकर चाटकर खाने से अस्थमा शांत रहता है।
  • हल्दी को पीसकर, तवे पर भूनकर शीशी में बंद करके रखें। 5 ग्राम हल्दी हल्के गर्म जल से प्रतिदिन सेवन करने पर अस्थमा रोगी को बहुत लाभ होता है।
  • अधिक खांसने पर भी कफ नहीं निकलता हो तो वक्षस्थल पर सरसों के 20 ग्राम तेल में 5 ग्राम सेंधा नमक अच्छी तरह मिलाकर मालिश करें।
  • अस्थमा में सांस अवरोध होने पर कॉफी पीने से बहुत शांति मिलती है।
  • चौलाई की सब्जी बनाकर रोगी को खिलाने से अस्थमा में बहुत लाभ होता है।
  • चौलाई के पत्तों का 5 ग्राम रस मधु मिलाकर चटाने से सांस की पीड़ा नष्ट होती अंजीर के चार दाने रात्रि को जल में डालकर रखें। प्रातः उन दानों को थोड़ा-सा मसलकर जल पीने से अस्थमा में बहुत लाभ होता है। कब्ज भी नहीं रहती।

अस्थमा रोग का घरेलु इलाज

दमा के रोगी क्या खाये?

  • खजूर के दो दाने गुठली निकालकर 3 ग्राम सोंठ के चूर्ण के साथ पान में रखकर सेवन करने से अस्थमा में स्वास अवरोध नष्ट होता है।
  • खादिर (कत्था), हल्दी और मिसरी प्रत्येक की 2-2 ग्राम मात्रा लेकर मधु के साथ सुबह-शाम सेवन करने से अस्थमा में बहुत लाभ होता है।
  • 20 ग्राम अकरकरा को 200 ग्राम जल में उबालकर काढ़ा बनाकर 50 ग्राम शेष रहने पर मधु मिलाकर सेवन कराने से अस्थमा रोग में लाभ होता है।
  • अंकोल की जड़ 10 ग्राम को नीबू के रस के साथ पीसकर 5 ग्राम मात्रा को भोजन से एक घंटा पहले सेवन करने से अस्थमा में सांस पीड़ा नष्ट होती है।
  • अनार के दानों को कूट-पीसकर चूर्ण बनाकर रखें। 3 ग्राम चूर्ण मधु मिलाकर दिन में दो बार सेवन करने से अस्थमा में पीड़ा नष्ट होती है।

अस्थमा रोग के इलाज के देसी इलाज

  • अग्निमथ 25 ग्राम को लेकर 200 ग्राम जल में उबालकर काढ़ा बनाएं, 50 ग्राम शेष रह जाने पर थोड़ा-सा यवक्षार और सेंधा नमक मिलाकर सेवन करने से खांसी और सांस पीड़ा नष्ट होती है।
  • पुष्कर की जड़ 5 ग्राम को पीसकर, अतीस का बारीक चूर्ण 2 ग्राम मिलाकर मधु के साथ चाटने से अस्थमा में बहुत लाभ होता है।
  • दो-तीन लौंग 150 ग्राम जल में उबालकर थोड़ा-थोड़ा जल पीने से अस्थमा-सांस अवरोध नष्ट होता है।

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